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CJI B.R. Gavai ने बताया जूता फेंकने का मामला ‘भूल चुका अध्याय’, सुप्रीम कोर्ट में फिर शुरू हुई बहस

Satyakhabarindia

CJI B.R. Gavai पर सोमवार को जूता फेंकने की घटना ने सुप्रीम कोर्ट में हलचल मचा दी थी। हालांकि, CJI गवई ने अब इस घटना को एक “भूल चुका अध्याय” बताया है। उनके साथ न्यायाधीशों ने इस कृत्य को सुप्रीम कोर्ट का अपमान करार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके और उनके साथ न्यायाधीशों के लिए यह घटना अब एक भूल चुका अध्याय है और उन्होंने मामले को गंभीरता के साथ आगे बढ़ाने की बजाय कोर्ट की कार्यवाही जारी रखी।

CJI की प्रतिक्रिया और न्यायालय की स्थिति

CJI गवई ने सुनवाई के दौरान इस मामले पर अपनी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा, “मेरे शिक्षित भाइयों (न्यायाधीशों) और मैं सोमवार को हुई घटना से गहरे स्तब्ध हैं। हमारे लिए यह एक भूल चुका अध्याय है।” इस बयान के साथ उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही को जारी रखा और घटना को व्यक्तिगत रूप से बढ़ावा देने से बचा। उनके इस रुख ने अदालत में बहस को शांत करने की कोशिश की, लेकिन न्यायिक समुदाय में इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

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न्यायाधीश उज्ज्वल भूयां और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की प्रतिक्रिया

हालांकि, न्यायाधीश उज्ज्वल भूयां ने CJI की प्रतिक्रिया से असहमति जताई। न्यायाधीश भूयां ने कहा, “मेरी अपनी राय है। वह CJI हैं, यह कोई मजाक नहीं है।” उन्होंने इस घटना को सुप्रीम कोर्ट के सम्मान पर धब्बा लगाने वाला कृत्य बताया। इसी तरह, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस हमले को अक्षम्य बताया और CJI की सहनशीलता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह हमला मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अस्वीकार्य और गंभीर था, लेकिन CJI की उदारता ने स्थिति को संभाला।

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6 अक्टूबर की घटना का विवरण

यह ध्यान देने योग्य है कि 6 अक्टूबर 2025 को एक वकील ने CJI बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और आरोपी को कोर्ट से बाहर ले गए। बाहर जाते समय आरोपी ने जोर से नारे लगाए, “भारत सनातन धर्म के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा।” यह घटना न केवल अदालत की गरिमा को चुनौती देने वाली थी बल्कि न्यायिक सुरक्षा और प्रोसीजर की गंभीरता पर भी सवाल उठाती है। CJI गवई ने हालांकि इस घटना को गंभीरता के साथ देखा और कोर्ट की कार्यवाही को आगे बढ़ाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे स्थिति को व्यक्तिगत आघात की तरह नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं।

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